उत्तराखंड

मुख्यमंत्री धामी का कार्यकाल महज़ खोखली बयानबाज़ी – गणेश गोदियाल

धामी के पांच साल: उत्तराखंड की जनता बेहाल, इतिहास ठोस काम से दर्ज होता है- गोदियाल 

 

देहरादून।उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पांच साल और भाजपा सरकार के साढ़े नौ साल के कार्यकाल पर तीखा हमला बोलते हुए सरकार के कामकाज को दिशाहीन और जनविरोधी बताया है।

गणेश गोदियाल ने कहा कि कोई भी मुख्यमंत्री या सरकार केवल झूठी बयानबाज़ी और विज्ञापनों के सहारे इतिहास में जगह नहीं बना सकती। इतिहास हमेशा जनता के हित में किए गए ठोस और दूरगामी कार्यों से लिखा जाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह विफल रही है और प्रदेश पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज़ चढ़ा दिया है। उनके अनुसार वर्ष 2017 में कांग्रेस सरकार के सत्ता छोड़ने के समय राज्य पर लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का कर्ज़ था, जो अब बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार राजस्व के नए स्रोत विकसित करने में भी नाकाम रही है।

गोदियाल ने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, सड़क और रोजगार जैसे बुनियादी क्षेत्रों की लगातार उपेक्षा की गई है। राज्य का बजट केवल आंकड़ों की बाजीगरी बनकर रह गया है, जबकि विकास धरातल पर दिखाई नहीं देता और केवल कागजों तथा विज्ञापनों तक सीमित है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के मुद्दों पर विफल रहने के बाद मुख्यमंत्री धामी आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए ध्रुवीकरण की राजनीति कर रहे हैं। जनता का ध्यान मूल समस्याओं से हटाने के लिए तीखी बयानबाज़ी और नफरत की राजनीति की जा रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि धामी मंत्रिमंडल में अंतर्विरोध साफ दिखाई दे रहे हैं। भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है, जबकि कांग्रेस पृष्ठभूमि से आए नेताओं का दबदबा बढ़ता जा रहा है। इससे भाजपा में नेतृत्व संकट की स्थिति स्पष्ट होती है।

महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए गोदियाल ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच की प्रगति अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित वीआईपी का नाम सामने आने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और ऐसे लोगों का देवभूमि में स्वागत कर प्रदेश की बेटियों का अपमान किया गया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता महंगाई से परेशान है और भाजपा अपने दृष्टिपत्र में किए गए वादों को पूरा करने में असफल रही है। उनका दावा है कि जनता अब भाजपा की वास्तविकता समझ चुकी है और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन का मन बना चुकी है।